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परिणाम चाहे जो भी हों, यह चुनाव पहले से ही वैश्विक बाज़ारों में हलचल पैदा कर रहा है, जिससे ट्रेडर्स के लिए आगे की स्थिति का पूर्वानुमान लगाना ज़रूरी हो गया है। यह लेख उन चार प्रमुख क्षेत्रों की पड़ताल करेगा, जिन पर चुनाव का असर पड़ सकता है:
→ कूटनीति और ट्रेड।
→ राजकोषीय और टैक्स नीतियाँ।
→ बाज़ार की धारणा।
→ मौद्रिक नीति।
सबसे ज़रूरी बात यह है कि यह लेख इस बात की पड़ताल करेगा कि ये क्षेत्र सोने, अमेरिकी डॉलर और अन्य प्रमुख इंस्ट्रूमेंट्स को कैसे प्रभावित कर सकते हैं।
ट्रेड नीति इस समय एक ऐसी चीज़ है, जिस पर चुनाव के दौरान सबसे ज़्यादा नज़र होगी, खासकर अमेरिका और चीन के बीच चल रहे आर्थिक तनातनी के चलते। चुनाव नतीजे पर निर्भर करेगा कि दोनों देशों के बीच संबंध स्थिर रहेगा या और बिगड़ सकता है। अगर डोनाल्ड ट्रम्प फिर से चुने जाते हैं, तो चीनी आयात पर टैरिफ़ बढ़ने की संभावना है, जिससे अमेरिका का व्यापार घाटा थोड़ा कम हो सकता है।
वहीं दूसरी ओर, अगर कमला हैरिस जीतती हैं, तो ट्रेड पर ज्यादा असर पड़ने की संभावना नहीं है। ट्रम्प के द्वारा ट्रेड में हलचल पैदा करने के बाद सोने जैसे सुरक्षित निवेश में निश्चित रूप से लाभ हो सकता है, लेकिन हैरिस के सत्ता में आने पर अगर आर्थिक नीतियाँ निवेशकों का भरोसा बढ़ाती हैं, तो यह अच्छा प्रदर्शन कर सकता है।
राष्ट्रपति चाहे जो भी बने, सरकारी खर्च में बढ़ोतरी की उम्मीद की जा रही है, लेकिन दोनों का दृष्टिकोण अलग होगा। हाल ही में अमेरिका का राष्ट्रीय कर्ज़ $34.5 ट्रिलियन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया है और दोनों उम्मीदवारों की योजनाओं पर गौर करें, तो इसके और बढ़ने की संभावना है।
अगर ट्रम्प जीतते हैं, तो टैक्स कटौती की उम्मीद की जा सकती है और उनकी सरकार खर्च के रूढ़िवादी तरीके को अपनाएगी। इसके विपरीत, हैरिस सामाजिक कार्यक्रमों पर अधिक खर्च को बढ़ावा दे सकती हैं, लेकिन ट्रैक्स में विशेष कटौती की संभावना कम है।
किसी भी स्थिति में, अगले साल फिर से कर्ज़ सीमा के बढ़ने की संभावना है और
यह आगे भी बढ़ता रहेगा। हालाँकि, बाजारों में भरोसा मज़बूती के साथ बरकरार रहेगा।
इसका सीधा सा जवाब है कि 'नहीं'। वैसे तो राजकोषीय नीति सीधे सरकार से जुड़ी होती है, लेकिन मौद्रिक नीति का दायित्व फे़डरल रिजर्व के पास है। उदाहरण के लिए, 2018 और 2019 में ट्रम्प ने बार-बार कहा कि दरें बहुत अधिक हैं, लेकिन उनके इन नज़रिए का कुल मौद्रिक नीति पर बहुत कम असर देखा गया। महँगाई और आर्थिक स्थिति को देखते हुए फे़डरल रिज़र्व द्वारा ब्याज़ दरों में कमी किए जाने की उम्मीद है, फिर चाहे जो भी राष्ट्रपति चुना जाए।
CME FedWatch टूल के डेटा के अनुसार, आने वाले समय में की जाने वाली दर कटौती को लेकर ट्रेडर्स की उम्मीदों में बदलाव देखा गया है। वैसे तो चुनाव का असर राजकोषीय नीतियों पर पड़ सकता है, लेकिन मौद्रिक नीति तब तक इससे अछूती रहेगी, जब तक कि सरकार अत्यधिक उपाय न करे। यहाँ ट्रेडर्स के लिए दो बेहद अहम बिंदु हैं:
इस साल कुल पाँच या उससे ज़्यादा बार दरों में कटौती किए जाने की संभावना कम है।
यह राजनीति से लगभग पूरी तरह से अलग बात है, जब तक कि अगली सरकार महँगाई को प्रभावित करने वाली आक्रामक नीतियाँ नहीं लेकर आती।
यही कारण है कि चुनाव के दौरान आर्थिक डेटा और मौद्रिक नीति में ढील के लिए उम्मीदों का संदर्भ समझना ज़रूरी है। आइए उन प्रमुख इंस्ट्रूमेंट्स पर नज़र डालें, जिन पर इस अवधि के दौरान सबसे अधिक असर पड़ सकता है:
अमेरिकी डॉलर (USD)
हालाँकि, चुनाव मुद्रा बाज़ार को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन इस बात की संभावना अधिक है कि अमेरिकी डॉलर की चाल को फे़डरल रिज़र्व द्वारा उठाए जाने वाले कदम आगे बढ़ाते रहें। ट्रेडर्स को महँगाई और रोज़गार के आँकड़ों पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि ये डॉलर पर चुनाव के परिणाम की तुलना में अधिक असर डालेंगे।
स्टॉक
हैरिस प्रशासन के तहत, प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य देखभाल जैसे उद्योगों को अधिक रेगुलेशन का सामना करना पड़ सकता है, जबकि ट्रम्प की नीतियाँ टैक्स कटौती और ट्रेड नीतियों के लिए अधिक वाज़िब हो सकती हैं। हालाँकि, ट्रम्प के फिर से चुने जाने पर ट्रेड वॉर और नए टैरिफ़ की संभावनाओं के चलते स्टॉक मार्केट पर दबाव बन सकता है।
ऑयल (USOIL)
हैरिस प्रशासन के तहत हरित ऊर्जा को अधिक बढ़ावा दिए जाने की संभावना है, लेकिन दीर्घकालिक तौर पर इसका ऑयल की कीमतों पर बहुत ज़्यादा असर नहीं पड़ेगा। इसके बजाय, ऑयल ट्रेडर्स को अमेरिकी माँग और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की गतिशीलता पर ध्यान देना चाहिए।
सोने में पिछले साल से ही लगातार मज़बूती देखी जा रही है, जिसके चलते मौद्रिक नीति और वैश्विक जोखिमों के इर्द-गिर्द अस्थिरता को समर्थन मिला है। अभी तक के लिए इस ट्रेंड में किसी तरह का बदलाव होने की संभावना कम है, लेकिन मौलिक कारकों के आधार पर इसकी रफ़्तार कुछ सुस्त हो सकती है।
ऐतिहासिक रूप से, डेमोक्रेटिक राष्ट्रपतियों के तहत सोना बेहतर प्रदर्शन करता है, हालाँकि ऐसा हमेशा हो, यह संभव नहीं है। हैरिस की जीत से सोने को एक सुरक्षित निवेश के रूप में बढ़ावा मिल सकता है, जबकि ट्रम्प अगर एक बार फिर से चुने जाते हैं, तो सोने में स्थिरता आ सकती है या इसमें सुधार हो सकता है। हालाँकि, दोनों ही परिस्थितियों में ट्रेडर्स को अस्थिरता के लिए तैयार रहना चाहिए।
अस्थिरता के दौरान, ट्रेडर्स के बीच सोने का आकर्षण बढ़ जाता है और हाल ही में Exness ने सोने पर अपने CFD स्प्रेड को 20% तक कम कर दिया है, जिससे ट्रेडर कम ट्रेडिंग लागत के साथ इन बदलावों का लाभ उठा सकते हैं। अमेरिकी चुनाव जैसे इवेंट्स के दौरान, तेज़ निष्पादन और कम लागत की अहमियत बढ़ जाती है।
आखिरकार, बाज़ार की धारणा चुनावी माहौल के बदलाव के आधार पर जल्दी बदल सकती है। सत्ता का सुचारू रूप से हस्तांतरण या विवादास्पद परिणाम निवेशकों के भरोसे को नाटकीय रूप से प्रभावित कर सकता है, जिससे इक्विटी, मुद्रा और कमोडिटी में तेज़ उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ट्रेडर्स के लिए मुख्य बात यह है कि राजनीतिक सुर्खियों और आर्थिक डेटा पर नज़र बनाए रखते हुए लचीला रुख अपनाएँ और किसी भी परिस्थिति के लिए तैयार रहें।
हालाँकि, अमेरिकी चुनावों का परिणाम किसके पक्ष में जाएगा, इसके बारे में अभी कुछ भी नहीं कहा जा सकता। ऐसे में, व्यापक आर्थिक संदर्भ को समझना इस महत्वपूर्ण अवधि के दौरान नेविगेट करने की कुंजी है। ट्रेड, राजकोषीय नीतियों, और बाज़ार की भावना जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करके, ट्रेडर सोने, अमेरिकी डॉलर, और इक्विटी जैसे प्रमुख इंस्ट्रूमेंट्स में होने वाली संभावित हलचल का बेहतर पूर्वानुमान लगा सकते हैं। सही तैयारी और दुनिया के सबसे बड़े रिटेल ब्रोकर में से एक Exness जैसे भरोसेमंद ट्रेडिंग भागीदार के साथ, ट्रेडर अमेरिकी चुनावी अवधि की अस्थिरता का अधिक आत्मविश्वास के साथ सामना कर सकते हैं।