क्रूड ऑयल अमेरिकी आंकड़ों में कच्चे तेल के भंडार बढ़ने से मामूली फिसला
नई दिल्ली (आई-ग्रेन इंडिया)। केन्द्र सरकार देश में दाल-दलहनों की आपूर्ति एवं उपलब्धता बढ़ाने तथा कीमतों में तेजी पर अंकुश लगाने के लिए सभी आवश्यक एहतियाती कदम उठा रही है। दलहनों और खासकर तुवर तथा उड़द के वास्तविक स्टॉक का पता लगाने के लिए गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं क्योंकि इन दोनों दलहनों के दाम में ही ज्यादा बढ़ोत्तरी हुई है। इस बीच यह संदेह भी व्यक्त किया जा रहा है कि मार्च के दूसरे सप्ताह से लेकर अप्रैल के प्रथम सप्ताह तक हुई भारी वर्षा एवं ओलावृष्टि से रबी कालीन दलहन फसलों को कुछ क्षति हुई है जबकि खरीफ कालीन दलहनों को पहले ही नुकसान हो चुका था।
केन्द्रीय उपभोक्ता मामले सचिव रोहित कुमार सिंह ने 15 अप्रैल को मध्य प्रदेश के इंदौर में दाल मिलर्स एवं व्यापारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की थी। उनका कहना था कि खाद्य उपभोक्ता मामले एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के 12 अधिकारियों ने देश के विभिन्न भागों में बाजार के सहभागियों के साथ बातचीत की है। व्यापारियों एवं मिलर्स आदि को सरकारी पोर्टल पर दलहनों के अपने कुल स्टॉक का विवरण नियमित रूप से अपलोड करना चाहिए ताकि सरकार को आगे की रणनीति बनाने का ठोस आधार हासिल हो सके। जो व्यापारी-मिलर्स स्टॉक विवरण का खुलासा नहीं करने का दोषी पाए जायेंगे उसके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। व्यापारियों- मिलर्स को प्रत्येक शुक्रवार को अपने स्टॉक विवरण को अपडेट करना होगा। इस निर्देश का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा 2022-23 के सम्पूर्ण मार्केटिंग सीजन के लिए कृषि फसलों के उत्पादन का दूसरा अग्रिम अनुमान 14 फरवरी 2023 को जारी किया गया था जबकि तीसरा अग्रिम अनुमान मध्य मई में जारी किए जाने की संभावना है। इतना तो निश्चित है कि खरीफ सीजन के सबसे प्रमुख दलहन- अरहर (तुवर) का उत्पादन पिछले साल से कम हुआ है जो महाराष्ट्र एवं कर्नाटक जैसे शीर्ष उत्पादक प्रांतों के कृषि विभागों द्वारा जारी आंकड़ों से भी स्पष्ट होता है। कृषि मंत्रालय ने चना तथा मसूर के उत्पादन में अच्छी बढ़ोत्तरी का अनुमान लगाया था लेकिन मार्च माह की प्राकृतिक आपदाओं से फसल को हुए नुकसान के बाद सरकार इसके उत्पादन अनुमान में कितना संशोधन करती है- यह देखना दिलचस्प होगा। देश में 52 प्रतिशत दलहनों का उत्पादन रबी सीजन में तथा 48 प्रतिशत का उत्पादन खरीफ सीजन में होता है।
