ITC को डाउनग्रेड किया गया क्योंकि भारत में सिगरेट टैक्स बढ़ने से वॉल्यूम और कमाई पर खतरा है
नई दिल्ली (आई-ग्रेन इंडिया)। दो वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने कहा है कि कुछ भारतीय आयातकों ने म्यांमार में तुवर एवं उड़द का आयात अनुबंध तो किया लेकिन वे वहां से भारत में उसका स्टॉक नहीं ला रहे हैं बल्कि इसके बजाए उन्होंने वहीँ इसका स्टॉक जमा कर रखा है ताकि घरेलू बाजार में भाव उछलने पर उसे मंगाकर मोटा मुनाफा बनाया जा सके। जनवरी-मार्च 2023 की तिमाही के दौरान भारतीय बाजारों में मिल क्वालिटी अरहर (तुवर) एवं उड़द के दाम में काफी उछाल आ गया जबकि आगामी दिनों के दौरान इसमें कुछ और तेजी आने की उम्मीद की जा रही है क्योंकि घरेलू प्रभाग में इन दोनों दलहनों का अभाव महसूस किया जा रहा है। हालांकि केन्द्र सरकार कीमतों में तेजी पर अंकुश लगाने का हर संभव प्रयास कर रही है और प्रमुख उत्पादक राज्यों- महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश तथा तमिलनाडु में जगह-जगह छापेमारी भी की गई है लेकिन इससे बाजार भाव पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ा है।
मिल क्वालिटी तुवर एवं उड़द का भाव महाराष्ट्र की अकोला एवं लातूर मंडी में 8000/8500 रुपए प्रति क्विंटल तथा गुजरात की राजकोट एवं अहमदाबाद मंडी और आंध्र प्रदेश की गुंटूर मंडी में 7000/8000 रुपए प्रति क्विंटल के बीच चल रहा है जो न्यूनतम समर्थन मूल्य से काफी ऊंचा है। उल्लेखनीय है कि केन्द्र सरकार ने 2022-23 के सीजन हेतु अरहर (तुवर) एवं उड़द का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाकर 6600-6600 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है।
फरवरी से अब तक तुवर के औसत मॉडल मूल्य में करीब 13 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हो चुकी है। गत 28 मार्च को महाराष्ट्र की अकोला मंडी में तुवर का भाव उछलकर 8900 रुपए प्रति क्विंटल के शीर्ष स्तर पर पहुंच गया। इसी तरह 27 मार्च को आंध्र प्रदेश की गुंटूर मंडी में उड़द का दाम बढ़कर 7850 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंचा जो चालू सीजन का सबसे ऊंचा मूल्य स्तर था। हालांकि रबी सीजन के दौरान दक्षिण भारत में उड़द की अच्छी खेती होती है लेकिन अभी तक नए माल की आपूर्ति जोर नहीं पकड़ पाई है इसलिए कीमतों में तेजी-मजबूती का माहौल बना हुआ है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार ऐसी खबर मिल रही है कि कुछ भारतीय आयातक फर्म ने म्यांमार में लगभग 1.50 लाख टन तुवर एवं करीब 2 लाख टन उड़द का स्टॉक जमा कर रखा है। म्यांमार में स्थित भारतीय उच्चायोग को इस मामले की जांच-पड़ताल करने के लिए कहा गया है और इसमें स्थानीय अधिकारियों से सहयोग लेकर हकीकत का पता लगाया जा रहा है। उच्चायोग को यह सुनिश्चित करना है कि म्यांमार में कोई भी भारतीय दलहन आयातक तुवर तथा उड़द की जमाखोरी न कर पाये। केन्द्र सरकार उच्चायोग के निरंतर संपर्क में है।
