iGrain India - नई दिल्ली । केन्द्र सरकार द्वारा एथनॉल निर्माताओं को अपने स्टॉक से चावल की आपूर्ति बंद किए जाने के कारण अब उसे म्यांमार से मक्का के आयात का प्रयास करना पड़ रहा है।
सरकार ने एथनॉल निर्माण में गन्ना के उपयोग पर भी नियंत्रण लगा दिया है। इससे पेट्रोल में एथनॉल के मिश्रण का कार्यक्रम प्रभावित होने की आशंका है। इसे देखते हुए कुछ उद्यमी एवं व्यापारी म्यांमार से मक्का के आयात का प्लान बना रहे हैं।
उद्योग समीक्षकों का कहना है कि यदि एथनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल करना है तो विदेशों से मक्का मंगाना आवश्यक है क्योंकि घरेलू प्रभाग में उस उद्देश्य के लिए मक्का का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध नहीं है।
कुछ आयातकों ने मक्का की खरीद के लिए म्यांमार के साथ बातचीत भी आरंभ कर दी है। व्यापार विश्लेषकों के अनुसार यदि एथनॉल निर्माण में स्वदेशी मक्का का उपयोग शुरू किया गया तो इसकी मांग एवं कीमत में भारी बढ़ोत्तरी हो सकती है।
उधर म्यांमार में मक्का का दाम प्रतिस्पर्धी स्तर पर चल रहा है। भारत सरकार ने वर्ष 2025 तक पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल के मिश्रण का लक्ष्य नियत किया है जबकि फिलहाल 12 प्रतिशत मिश्रण का लक्ष्य ही हासिल हो सका है।
चालू वर्ष के दौरान एथनॉल का घरेलू उत्पादन घटने की संभावना है क्योंकि इसके निर्माण में गन्ना जूस एवं शुगर सीरप के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है। अब केवल 17 लाख टन गन्ना जूस का उपयोग इसमें हो सकता है।
अनाज आधिकारिक डिस्टीलरीज के लिए भी संकट बढ़ गया है। उसे खुले बाजार से इसकी खरीद करनी पड़ रही है जबकि वहां इसका भाव ऊंचा चल रहा है।
भारत में इससे पूर्व पॉल्ट्री उद्योग की जरूरत को पूरा करने के लिए यूक्रेन से मक्का का आयात हुआ था जबकि अब एथनॉल निर्माण के लिए म्यांमार से इसका आयात शुरू हो सकता है। म्यांमार अब तक मुख्यत: थाईलैंड को अपने मक्के का निर्यात करता रहा है।